Class 10th Sanskrit Chapter 2 Subjective Questions Answer 2026 | Bihar Board Sanskrit Notes

Nilkamal Sir
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 इस पोस्ट में Bihar Board Class 10th Sanskrit Chapter 2 के सभी महत्वपूर्ण Subjective Questions Answer सरल एवं आसान हिंदी भाषा में दिए गए हैं। यहाँ आपको लघु उत्तरीय प्रश्न, दीर्घ उत्तरीय प्रश्न, व्याख्या, भावार्थ, शब्दार्थ तथा परीक्षा में पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर मिलेंगे।

सभी उत्तर नए सिलेबस एवं बोर्ड परीक्षा 2026 के अनुसार तैयार किए गए हैं ताकि छात्र कम समय में अच्छी तैयारी कर सकें। यह नोट्स Revision तथा बोर्ड परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए बहुत उपयोगी है।

1. प्राचीन संस्कृत ग्रंथों में पाटलिपुत्र की ख्याति किस रूप में थी ?

उत्तर : प्राचीन संस्कृत ग्रंथों तथा पुराणों में पाटलिपुत्र को पुष्पपुर एवं कुसुमपुर के नाम से प्रसिद्ध बताया गया है। इस नगर के आसपास पाटल पुष्पों की अधिकता थी, इसलिए इसका नाम पाटलिपुत्र पड़ा। शरद ऋतु में यहाँ कौमुदी महोत्सव का आयोजन किया जाता था, जो दुर्गापूजा के उत्सव के समान भव्य और आकर्षक होता था। इस प्रकार प्राचीन काल से ही पाटलिपुत्र अपनी सुंदरता और प्रसिद्धि के कारण विख्यात था।


Class10th Sanskrit Chapter 2 Subjective question 

2. पाटलिपुत्र नगर के वैभव का वर्णन करें।

उत्तर : पाटलिपुत्र प्राचीनकाल से ही अपने वैभव और समृद्धि के लिए प्रसिद्ध रहा है। अनेक विदेशी यात्रियों ने अपने संस्मरणों में यहाँ की समृद्धि, सुंदरता और उत्कृष्ट व्यवस्था का वर्णन किया है। यूनानी राजदूत मेगास्थनीज ने लिखा है कि चन्द्रगुप्त मौर्य के शासनकाल में पाटलिपुत्र की शोभा और सुरक्षा व्यवस्था अत्यंत उत्तम थी। सम्राट अशोक के समय यह नगर और भी अधिक समृद्ध एवं विकसित हुआ।

कवि राजशेखर ने अपनी पुस्तक काव्यमीमांसा में लिखा है कि यहाँ बड़े-बड़े कवि, व्याकरणाचार्य तथा भाष्यकारों की परीक्षा ली जाती थी। वर्तमान समय में यही पाटलिपुत्र पटना के नाम से प्रसिद्ध है, जहाँ संग्रहालय, गोलघर तथा जैविक उद्यान जैसे अनेक दर्शनीय स्थल स्थित हैं। इस प्रकार पाटलिपुत्र प्राचीन काल से आज तक अपने वैभव और गौरव को बनाए हुए है।

3. कवि दामोदर गुप्त के अनुसार पाटलिपुत्र कैसा नगर है ?

उत्तर : कवि दामोदर गुप्त के अनुसार पाटलिपुत्र पृथ्वी पर बसे नगरों में सबसे श्रेष्ठ और महान नगर है। यहाँ विद्वानों एवं ज्ञानियों का निवास था, जिन्हें सरस्वती का वंशज कहा गया है। कवि ने इस नगर की तुलना देवराज इन्द्र की भव्य नगरी से की है। इससे स्पष्ट होता है कि पाटलिपुत्र ज्ञान, वैभव और संस्कृति का महान केंद्र था।

4. पाटलिपुत्र को शिक्षा का प्राचीन केंद्र क्यों माना जाता है ?

उत्तर : पाटलिपुत्र को प्राचीनकाल का महान शिक्षा केंद्र माना जाता है। राजशेखर द्वारा रचित काव्यमीमांसा से ज्ञात होता है कि यहाँ संस्कृत के अनेक महान विद्वान रहते थे। पाणिनी, पिङ्गल, वररुचि तथा पतञ्जलि जैसे प्रसिद्ध विद्वानों की परीक्षा यहीं ली गई थी तथा उन्होंने यहीं से ख्याति प्राप्त की थी। इसी कारण पाटलिपुत्र को प्राचीन भारत का महत्वपूर्ण शैक्षणिक केंद्र माना जाता है।

5. चन्द्रगुप्त मौर्य तथा अशोक के समय पाटलिपुत्र कैसा नगर था ?

उत्तर : चन्द्रगुप्त मौर्य के शासनकाल में पाटलिपुत्र की सुरक्षा व्यवस्था अत्यंत मजबूत और सुव्यवस्थित थी। यह नगर बहुत सुंदर, समृद्ध तथा व्यवस्थित था। सम्राट अशोक के समय पाटलिपुत्र का वैभव और भी अधिक बढ़ गया। उस समय यह नगर कला, संस्कृति, धर्म तथा प्रशासन का प्रमुख केंद्र बन गया था।

6. सिख संप्रदाय के लोगों के लिए पटना नगर क्यों महत्त्वपूर्ण है ?

उत्तर : सिख संप्रदाय के लोगों के लिए पटना नगर अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहाँ सिखों के दसवें गुरु गुरु गोविन्द सिंह जी का जन्म हुआ था। उनका जन्मस्थान आज तख्त श्री हरमंदिर साहिब गुरुद्वारा के नाम से प्रसिद्ध है। यहाँ देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु दर्शन और पूजा के लिए आते हैं। इसलिए पटना सिख धर्म का एक प्रमुख तीर्थस्थल माना जाता है।

7. सिख संप्रदाय के लोगों के लिए पटना नगर क्यों महत्त्वपूर्ण है ?

उत्तर : पटना नगर सिख संप्रदाय के लोगों के लिए अत्यंत पूजनीय स्थल है। यहाँ गुरु गोविन्द सिंह जी का जन्मस्थान स्थित है, जो गुरुद्वारा के रूप में प्रसिद्ध है। इस पवित्र स्थान के दर्शन के लिए देश-विदेश से अनेक श्रद्धालु आते हैं। इस कारण पटना सिख धर्म के प्रमुख धार्मिक केंद्रों में गिना जाता है।

8. प्राचीन पाटलिपुत्र में शिक्षा के संबंध में लेखक के क्या विचार हैं ?

उत्तर : लेखक के अनुसार प्राचीन पाटलिपुत्र शिक्षा और विद्या का महान केंद्र था। कवि दामोदर गुप्त ने बताया है कि यहाँ विद्वानों और ज्ञानियों का निवास था। राजशेखर के अनुसार पाणिनी, पिङ्गल, वररुचि तथा पतञ्जलि जैसे महान विद्वानों की परीक्षा यहीं ली जाती थी। इससे स्पष्ट होता है कि पाटलिपुत्र प्राचीन भारत का एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक केंद्र था।

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